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दिव्यांग युवक को उसकी पैतृक दुकान में अधिकार दिलाने एवं कब्जे की निष्पक्ष जांच गुहार लगाता*

दिव्यांग युवक को उसकी पैतृक दुकान में अधिकार दिलाने एवं कब्जे की निष्पक्ष जांच गुहार लगाता**

 

 

एक दिव्यांग (विकलांग) व्यक्ति हूँ तथा अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य हूँ मेरे परिवार में मेरी पत्नी, दो बच्चे तथा मेरी वृद्ध माता हैं, जो गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के कारण बिस्तर पर हैं। परिवार के भरण-पोषण की संपूर्ण जिम्मेदारी मेरे ऊपर है।

 

मेरे दादाजी स्वर्गीय लीलाराम जी के नाम से घंटाघर, चश्मा गली स्थित दुकान संख्या 31 आवंटित है। उक्त दुकान पर मेरे ताऊजी के पुत्र राजू, अनिल एवं जितेंद्र द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। इसके अतिरिक्त आनंद सिनेमा, व्यास मार्केट स्थित दुकान संख्या 13 पर भी उनका अवैध कब्जा है।

 

वर्ष 2021 से आज तक उक्त दुकानों से मुझे कोई आय अथवा खर्चा नहीं दिया जा रहा है और न ही मुझे दुकान पर बैठने अथवा अपना व्यवसाय करने दिया जा रहा है। दुकान के अधिकार को लेकर मेरे साथ तथा मेरे परिवार के सदस्यों के साथ लगातार दुर्व्यवहार एवं मारपीट की घटनाएँ होती रही हैं।

 

दिनांक 03 दिसंबर 2025 की रात्रि को राजू, अनिल एवं जितेंद्र द्वारा मेरे दोनों पुत्रों के साथ मारपीट की गई थी। इस संबंध में सदर थाना द्वारा उक्त तीनों व्यक्तियों को छह माह के लिए पाबंद भी किया गया था।

 

मैं पिछले कई वर्षों से अपनी समस्या के समाधान हेतु नगर निगम, जोधपुर के चक्कर लगा रहा हूँ। पूर्व आयुक्त महोदय द्वारा भी मामले की जांच का आश्वासन दिया गया था। लगभग चार माह पूर्व नगर निगम द्वारा दस्तावेज जमा करवाने हेतु मुझे नोटिस प्राप्त हुआ था, परंतु संबंधित कर्मचारियों द्वारा मेरी फाइल लेने में अनावश्यक आनाकानी की गई तथा मुझे लगातार कार्यालय के चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

 

मेरी दिव्यांगता एवं आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुझे परिवार का पालन-पोषण करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त दोनों दुकानों की निष्पक्ष एवं शीघ्र जांच करवाकर मुझे मेरा वैधानिक एवं न्यायोचित अधिकार दिलाने की कृपा करें।

 

साथ ही निवेदन है कि यदि इस प्रकरण के दौरान मेरे अथवा मेरे परिवार के किसी सदस्य को किसी प्रकार की जान-माल की हानि होती है, तो इसके लिए राजू, अनिल, जितेंद्र तथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारी उत्तरदा

यी माने जाएँ।

 

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